दिल्ली में लगा देश का पहला स्माॅग टावर, जानिए कैसे प्रदूषण को कंट्रोल करेगा यह टावर

सोमवार को दिल्ली में देश के पहले स्माॅग टावर का उद्घाटन हुआ. कनाॅट प्लेस में स्माॅग टावर का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने कहा कि इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया जा रहा है, यदि ये प्रयोग सफल रहा तो ऐसे और भी स्माॅग टावर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लगाए जाएंगे. इस 24 मीटर ऊंचे टावर को अमेरिका से आयात किया गया है. 

Smog Tower
Photo Source : Twitter/AAP

यह एक किलोमीटर के दायरे में हवा की गंदगी को साफ करने में सक्षम है. हालांकि अभी इसके साक्ष्य नहीं मिले हैं लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि एक महीने के आंकड़े से पता चल जाएगा कि यह टावर कितना कारगर है.

गौतम गंभीर ने भी लगावाए थे Air Purifier

इससे पहले भी पूर्व क्रिकेटर और भाजपा के सांसद गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) भी दिल्ली में एक स्माॅग टावर का उद्घाटन कर चुके हैं लेकिन वह केवल एक प्रोटोटाइप था. गौतम गंभीर फाउंडेशन द्वारा कृष्णा नगर, गांधी नगर और लाजपत नगर में स्थापित तीन छोटे एयर प्यूरीफायर (Air Purifier) लगाए गए थे, जो लगभग 12 फीट लंबे थे.

Smog Tower Delhi
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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश

हर साल ठंड के मौसम में दिल्ली का तापमान गिरने के साथ ही प्रदूषण अपने चरम स्तर पर पहुंच जाता है. हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा पराली जलाना इसके मुख्य कारणों में से एक है. इसी मामले में सुनवाई के दौरान साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और CPCB (Central Pollution Control Board) को आदेश दिया था कि लगातार बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न शहरों में स्माग टावर लगाए जाएं.

जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अप्रैल तक दो टावर लगाए जाएं. इसी के तहत दिल्ली सरकार ने इस बार ठंड का मौसम शुरू होने से पहले ही स्माॅग टावर लगाकर एक प्रयोग करने की कोशिश की है, जिससे दिल्ली की जनता को प्रदूषण से कुछ राहत मिल सके. 

तो आइए विस्तार से जानते हैं हवा साफ करने वाले स्माॅग टावर के बारे में – 

कैसा होता है स्माॅग टावर

यह एक 24 मीटर यानी लगभग 8 मंजिला ऊंचा एयर प्यूरीफायर (Air Purifier) है. इस एयर प्यूरीफायर में 18 मीटर की एक कंक्रीट की टावर है, जिसके उपर 6 मीटर ऊंची कैनोपी लगी हुई है. इसके बेस पर चारों तरफ कुल 40 पंखे लगे हुए हैं, जिसके हर एक साइड पर 10 पंखे हैं. स्माॅग टावर के अंदर दो परत में 5000 फिल्टर्स भी लगाए गए हैं. टावर में लगे हुए पंखों और फिल्टर्स को अमेरिका से आयात किया गया है. इस टावर के प्रत्येक पंखे एक सेकेंड में 25 क्यूबिक मीटर हवा को साफ करने में सक्षम है यानी पूरा टावर एक सेकेंड में 1,000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ कर देगा.

Smog Tower
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कैसे काम करता है स्माॅग टावर 

यह टावर ‘डाउनड्राफ्ट एयर क्लीनिंग सिस्टम’ की मदद से 24 मीटर की ऊंचाई पर हवा को सोखता है. इसके बाद हवा में मौजूद गंदगी फिल्टर होकर टावर के नीचले हिस्से में चला जाता हैं. जब टॉवर के निचले हिस्से में पंखे दबाव के कारण ऊपर से हवा अपनी तरफ खींचते हैं तो फिल्टर में का ‘मैक्रो’ परत हवा में मौजूद 10 माइक्रोन और उससे बड़े कणों को जबकि ‘माइक्रो’ परत लगभग 0.3 माइक्रोन के छोटे कणों को फिल्टर करके फिर से वातावरण में रिलीज कर देता है.

IIT Bombay और यूनिर्वसिटी ऑफ मिनेसोटा ने मिलकर बनाया

इस पायलट प्रोजेक्ट के इन-चार्ज और DPCC (Delhi Pollution Control Committee) के सीनियर वातावरण इंजीनियर अनवर अली खान ने बताया कि अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा ने IIT Bombay के साथ मिलकर इस टेक्नोलाॅजी को विकसित किया है, जिसमें टाटा प्रोजेक्ट (Tata Projects) ने वित्तीय सहायता प्रदान की.

कितना प्रभावी होगा स्माॅग टावर

स्माॅग टावर के प्रभाव को स्टडी करने का काम IIT Bombay और IIT Delhi को सौंपा गया है. IIT Bombay की कंप्यूटेशनल फ्लुइड डायनेमिक्स माॅडलिंग स्टडी के अनुसार यह टावर अपने एक किलोमीटर के दायरे में हवा को साफ करने में सक्षम है.

दोनों संस्थान दो साल तक इसके प्रभाव का स्टडी करेंगे. इस दो साल के पायलट स्टडी के दौरान वे टावर के वास्तविक प्रभाव का आंकलन करेंगे. इसके अलावा दोनों संस्थान यह भी देखेंगे कि साल के अलग-अलग मौसम में यह टॉवर कैसे काम करता है और हवा के PM 2.5 का स्तर कैसे बदलता है. 

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हवा की क्वालिटी को मापने के लिए लगा है स्वचालित सिस्टम

टावर में हवा की क्वालिटी को मापने के लिए एक स्वचालित (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम लगा हुआ है, जो तापमान और हवा में नमी को मापेगा. इसके अलावा यह सिस्टम हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 के कणों को भी मापकर टावर के टाॅप पर लगे बोर्ड पर प्रदर्शित करेगा. टावर के प्रभाव को आंकलन करने के लिए जल्द ही टावर से विभिन्न दूरी पर मॉनिटर लगाए जाएंगे. 

स्माॅग टावर के कारगर होने के अभी तक नहीं मिले हैं कोई साक्ष्य

एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्माॅग टावर के प्रभावी तरीके से काम करने का अभी पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं है. अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट डाटा नहीं मिला है, जिससे पता चल सके कि स्मॉग टावर ने भारत या किसी अन्य देश में हवा की क्वालिटी को सुधारने में कारगर साबित हुआ हो.

इसके अलावा उनका ये भी मानना है कि वातावरण के लगातार तेजी से बदलते परिवेश में हवा साफ करना मुश्किल है. उनके अनुसार प्रदूषण को जमीनी स्तर पर नियंत्रित करना होगा. सरकार का प्रयास होना चाहिए कि हम कम से कम ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करें और ज्यादा से ज्यादा से ग्रीन उर्जा का इस्तेमाल करें.

इससे पहले किस-किस देश ने किया है इसका इस्तेमाल

इसस पहले नीदरलैंड और दक्षिण कोरिया छोटे स्मॉग टावर लगा चुका है. इसके अलावा चीन में बड़े स्माॅग टावर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 60 मीटर होती है. चीन का स्माॅग टावर का अपड्राफ्ट टेक्नोलाॅजी पर काम करता है.

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