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The Spy Series: “Black Tiger” रॉ, पाकिस्तान, जासूसी, रवींद्र कौशिक और नबी अहमद शाकिर(Part – 2)

और फिर कौशिक ने वो किया जिसकी उम्मीद रॉ को भी नहीं थी

साल था 1975 उम्र थी महज़ 23 और रवींद्र तैयार थे एक ऐसे सफर पर जाने को जो उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाला था. उनको पाकिस्तान में जासूसी के लिए भेजा गया जिसके लिए उनका नया नाम था “नबी अहमद शाकिर”.

 उन्हें पहले दुबई भेजा गया और फिर वहां से वो पकिस्तान गए इधर भारत में उनके सभी तरह के डाक्यूमेंट्स को नष्ट कर दिया गया वहां कौशिक को बिना शक के घेरे में आये अपने कॉन्टेक्ट्स को मजबूत करना था जिससे वो वहां के सिस्टम से जुड़ी अहम जानकारियां रॉ तक पहुंचा पाएं.

तो सबसे पहले उन्होंने वहां कराची यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई को पूरा किया और फिर कौशिक ने वो किया जिसकी उम्मीद रॉ को भी नहीं थी अखबार में निकले एक विज्ञापन को देखकर उन्होंने पाकिस्तानी सेना में भर्ती के लिए अप्लाई किया और न सिर्फ अप्लाई किया बल्कि सारी परीक्षाओं को पास करते हुए पाक आर्मी में कमीशण्ड अधिकारी बने.

जब ये बात यहाँ रॉ में पता चली तो रॉ समझ गई की कौशिक रॉ के यूँ ही कोई एजेंट नहीं थे बल्कि बुद्धि और चातुर्य में भी सभी से काफी आगे थे.  फिर कौशिक को वहीँ पर आर्मी अफसर की बेटी “अमानत” से इश्क हो जाता है वे उससे शादी कर लेते हैं जिससे उनका एक बेटा भी होता है.

कुछ वर्षो में ही वो प्रोन्नत होकर मेजर बन जाते हैं और वर्ष 1979 से 1983 तक वे बहुत सी खुफिया जानकारी भारत तक पहुंचाते रहते हैं जिसकी वजह से भारत के हज़ारों सैनिकों की जाने बचीं और भारत पाकिस्तान से एक कदम आगे रहा. और इसी वजह से उनको भारतीय खुफिया तंत्र में उन्हें सभी ने “The Black Tiger” के नाम से जाना कहा जाता है की उनको ये उपनाम खुद तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंद्रा गाँधी ने दिया था….. और फिर आता है इस कहानी का दर्दनाक अंत. …….

साल था 1983 महीना था सितम्बर…. रॉ अपने एक एजेंट इनायत मसीह को पकिस्तान भेजती है Black Tiger से मिलने के लिए जो की पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी द्वारा पकड़ा जाता है और दर्दनाक प्रताड़नाओं से टूटकर Black Tiger के बारे में बता देता है जब पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी को पता चलता है की उनकी आर्मी में एक भारतीय spy मौजूद है तो पूरे महकमे में हड़कंप मच जाता है.

इनायत Black Tiger के रूप में नबी अहमद को पहचान लेता है फिर लगातार राज़ उगलवाने के लिए 2 वर्षों तक प्रताड़नाओं का दौर चलता है यहाँ तक की उनकी पत्नी “अमानत” को भी नहीं बक्शा जाता, बताया जाता है की जेल में अमानत को सिर्फ एक बार  मिलने दिया गया वो भी सिर्फ नबी को वो दूर से देख सकतीं थीं उन्हें बात कार्नर की इज़ाज़त नहीं दी गई.  उसके बाद से अमानत को कभी नहीं देखा गया हालाँकि कुछ मीडिआ रिपोर्ट्स का कहना है की उनके बेटे की मृत्यु 2012-13 में अज्ञात कारणों से हो गई.

साल था 1985 उनको फांसी की सजा सुनाई गई जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 25 वर्ष की आजीवन कारावास की सजा सुनाई. कौशिक का लिखा आखिरी खत जो उनकी माँ को उनकी मौत से तीन दिन पहले मिला उसमें उन्होंने गुस्सा व्यक्त किया था ये बताते हुए की जेल में उनको TB हो गया है और दिल की बीमारी भी वे आगे लिखते हैं –

अगर मैं अमेरिकी जासूस होता तो 3 दिनों में मैं यहाँ से बहार होता, क्या भारत जैसे बड़े देश के लिए कुर्बानी देने वाले को यही मिलता है

उनके भाई बताते हैं की माँ ने अटल बिहारी वाजपेई, एल.के.आडवाणी सब से गुहार लगाई और वो लोग कह देते की पाकिस्तान से बात चल रही है.  पर हमें नहीं लगता की भारत सरकार ने कुछ भी किया बस इतना किया की कौशिक की मौत के बाद उनको 500 रुपए पेंशन की तरह मिलने लगे कुछ सालों के बाद ये बढाकर 2000 कर दिए जो 2006 में उनकी माँ की मृत्यु हो जाने के बाद बंद हो गई.  यहाँ तक की कौशिक की मृत्यु हो जाने के बाद भारत सरकार ने उनके पार्थिव शरीर को भी वापस लाने की जेहमत नहीं उठाई। कौशिक की मौत सेंट्रल मुल्तान जेल में हुई और उनका शरीर वहीँ जेल के पीछे दफ़न कर दिया गया…….

भारत के एक महान देशभक्त को अंत में उसके देश की माटी भी नसीब न हुई लेकिन कौशिक ने बिना किसी स्वार्थ के देश के लिए जो कुर्बानी दी वो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी.

इस Story का पहला भाग पढ़िए यहाँ (The Spy Series: “Black Tiger” रॉ, पाकिस्तान, जासूसी, रवींद्र कौशिक और नबी अहमद शाकिर (Part -1))

अभी के लिए The Spy Series  में इतना ही हम जल्द ही लेकर आएंगे एक ऐसी ही रोचक कहानी तब तक के लिए आप पढ़ते रहिये azabgazab.com

 

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