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क्या आप जानते हैं सरदार पटेल की मूर्ति बनाने के लिए किसे हजारों तस्वीरों का करना पड़ा था विश्लेषण.?

हमारे देश की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के इस खास दिन में देश को एक नायाब और कभी ना भुलाया जा पाने वाला तोहफा दिया. दिन खास इसलिए चुना गया क्योंकि आज ही के दिन सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था. और इस खास दिन को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने तोहफा भी खास चुना. इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नाम से नवाजा गया. गुजरात में नर्मदा बांध के किनारे बनी सरदार पटेल की 182 मीटर की मूर्ति दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

पद्मश्री से नवाजे जा चुके हैं इस मूर्ति के रचियता-

दुनिया की सबसे बड़ी सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति यानि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को नोएडा के शिल्पकार राम वनजी सुतार ने बनाया है. आपको बता दें कि वह इससे पहले 50 विशाल मूर्तियां बना चुके हैं. उन्हें पदम भूषण और पदम श्री से सम्मानित किया जा चुका है. 2016 में उन्हें टैगोर अवॉर्ड से भी नवाजा गया.

चेहरे के चुनाव के लिए 2000 तस्वीरों का हुआ विश्लेषण-

आपको बता दें कि जब बात सरदार पटेल की मूर्ति के चेहरे की आई तो के शिल्पकार राम वनजी सुतार को उनकी 2000 तस्वीरों का विश्लेषण करना पड़ा था. उन्हें पटेल की मूर्ति का नेतृत्व इसलिए दिया गया था जिससे एक प्रभावशाली मूर्ति का निर्माण किया जा सके.

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ये है खास बात-

नोएडा सेक्टर19 में रहने वाले सुतार उस वक्त से मूर्तियां बना रहे हैं, जब से देश को आजादी मिली. सरकारें आती जाती रहीं लेकिन सुतार का मूर्ति प्रेम कम नहीं हुआ. सुतार ने बताया कि उन्होंने तमाम सरकारों में उनके नेताओं के लिए मूर्तियां बनाईं.

सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के गोंदूर गांव में हुआ था. वह 93 साल के हैं. सुतार ने 1953 में मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से मूर्ति बनाने में डिप्लोमा किया था.

 

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