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Brain washing क्या होता है ? क्या इससे काबू किया जा सकता है इंसान

वीडियो के जरिये भी किया जाता है ब्रेन वॉश

कोई व्यक्ति किसी से मिलने के बाद उसी की भाषा क्यों बोलने लगते है? आखिर उसके दिमाग के विचार एकदम से कैसे बदल सकते हैं. असल में ये सब brain washing का खेल है. किस तरह आतंकी संगठन सोशल मीडिया, वीडियोज और बुक्स के जरिए युवा लोगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश करते हैं

लेकिन क्या सच में किसी का ब्रेन वॉश हो सकता है वो जैसा नहीं है वैसा बन सकता है? क्या सच में किसी का दिमाग बदला जा सकता है इस बारे में हम विस्तार से आपको बताते हैं.

Brainwash

क्या है ब्रेन वॉशिंग ?

ब्रेनवॉशिंग किसी व्यक्ति की (सहमति या इच्छा के बगैर) उसकी सोच और विश्वास को बदलने की कोशिश है. साइकोलॉजी में ये सामाजिक प्रभाव (social influence) के दायरे में आता है और सामाजिक प्रभाव हर पल पड़ता है.किसी व्यक्ति की सोच कैसे भी बदली जा सकती है उसको बहला-फुसलाकर या फिर दिमाग में किसी तरह का प्रेशर डालकर.

Compliance

जैसे सामाजिक प्रभाव का एक तरीका है, Compliance, जिसमें किसी के व्यवहार को बदलने के लिए उसके अपने विचारों या विश्वास पर बदलने की कोशिश की जाती है. इसमें “बस ये काम कर दो” का तरीका अपनाया जाता है.

Mind Pressure

Persuasion

वहीं Persuasion में किसी के दृष्टिकोण और विश्वास प्रणाली को बदलने की कोशिश की जाती है. जैसे, “ये काम करो क्योंकि इससे तुम्हारा फायदा होगा.”

शिक्षा के द्वारा

किसी को शिक्षित करके भी व्यक्ति का ब्रेनवॉश किया जा सकता है जैसे, “ये काम करो क्योंकि तुम जानते हो कि यही सही है.”
ब्रेनवॉशिंग में किसी की सोच यहां तक कि व्यवहार दोनों को ही बदलने की दिशा में काम किया जाता है. वो शख्स खुद उस सोच या काम पर यकीन करने की कोशिश करने लगता है.

इस पर निर्भर करता है ब्रेन वॉश

जरूरी नहीं है कि किसी का भी ब्रेन वॉश किया जा सकता है ये निर्भर करता है कि जिसका ब्रेन वॉश किया जा रहा है उसकी सोचने समझने की शक्ति कैसी है. आतंकी संगठन ISIS में भर्ती के लिए कुछ यूनिट के लोगों से सोशल साइट्स पर दोस्ती करके ये देखते थे कि कौन-कौन से लोगों में दहशतगर्दों को लेकर सहानुभूति है.फिर वो सोचते हैं उनका किस तरह से ब्रेन वॉश करना है ?

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