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क्या होगा जब हम सहारा रेगिस्तान को सोलर पैनल्स से कर लेंगे कवर

दुनिया में ईंधन की उपब्धता में तेजी से कमी आ रही है. ऐसे में सूर्य की किरणों से प्राप्त ऊर्जा को ईंधन के सतत विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकता है. यह तरीका एनर्जी प्रॉब्लम के साल्यूशन का बेहतर ऑप्शन हो सकता है. वो भी बिलकुल उस कहावत की तरह जिसमें कहा गया है- ‘हर्रा लगे न फिटकरी, रंग भी आए चोखा.’

सौर किरणों की ऊर्जा को सोलर पैनल की मदद से इकट्ठा किया जाता है, लेकिन सोलर पैनल से जुड़े कुछ मसले भी हैं. पहला सोलर पैनल फार्म काफी बड़े होते हैं साथ ही इनको वहां लगाना होता है जहां सूर्य का प्रकाश बगैर किसी रुकावट, आसानी से और ज्यादा समय तक पहुंचता हो.

ऐसे में चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि धरती पर ऐसी जगह भी है जहां पर सूरज की रोशनी रोजाना पहुंचने की गारंटी भी है. यदि हम सहारा डेज़र्ट को सोलर पैनल से कवर कर लें तो क्या पूरी दुनिया की बिजली की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा?

इस मुद्दे से जुड़ी एक रिसर्च में सामने आया है कि यदि हम सहारा रेगिस्तान के महज 1.2 फीसदी क्षेत्र को सोलर पैनल्स से कवर करते हैं तो पूरी दुनिया की ऊर्जा से जुड़ी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं. अब सवाल यह उठता है कि ऐसा करने में किस तरह के भूगर्भीय और आर्थिक मुद्दों पर नजर रखना होगी. सवाल यह भी उठता है कि इस प्रोजेक्ट से रेगिस्तान के नियमित चक्र में तो किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचेगी?

तो इसका जवाब है नहीं क्योंकि सोलर फार्म वातावरण में बदलाव को रोकने में कारगर साबित हुआ है. सहारा रेगिस्तान में सोलर फार्म लगाने से रेतीली बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने में भी मदद मिल सकती है. इससे जुड़े एक विस्तृत शोध में निष्कर्ष निकाला गया है कि सोलर पैनल की लंबी श्रंखला से सहारा रेगिस्तान में दुगनी बारिश होगी जिससे वनस्पतियों की पैदावार में भी 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो सकती है.

शोध के मुताबिक सहारा की सफेद चमकीली रेत से टकराकर लौटने वाली लाइट और गर्मी वापस हवा में मिल जाती है. यदि रेत को सोलर पैनल से कवर कर दिया जाए तो सूर्य की ज्यादा किरणों को धरती पर रोककर उसकी गर्मी को सोखा जा सकेगा. ऐसा करने से सहारा की जमीन का तापमान बढ़ जाएगा जिसके कारण पैदा होने वाली ऊष्मा से बारिश का चक्र पूरा हो सकेगा.

इस प्रोसेस से न केवल मानवीय जरूरतों को पूरा करने सतत ऊर्जा का समाधान होगा बल्कि प्राकृतिक तरीके से सहारा की अनुपजाऊ जमीन को हरा-भरा कर उपजाऊ बनाया जा सकेगा. लेकिन क्या ये संभव है? तो इसका भी जवाब है हां.

लेकिन ऐसा करने के लिए तमाम देशों को बड़े-छोटे के अंतर की खाई को पाटना होगा और एक साथ मिलकर प्लानेट अर्थ की बेहतरी के लिए काम करना होगा. क्योंकि सूरज भी ब्रह्मांड में अपनी रोशनी बिखरने में किसी तरह की ऊंच-नींच और भेदभाव नहीं करता.

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