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भारत में कैसे हुआ बैंकों का राष्ट्रीयकरण, क्या थे इसके नियम?

बैंकों के राष्ट्रीयकरण से जुड़ी रोचक बातें

भारत में 1969 से पहले कमर्शियल बैंक आम लोगों के लिए नहीं थे. उस समय देश के 14 बड़े बैंकों के पास देश की लगभग 80% पूंजी थी. इन बैंकों पर केवल कुछ धनी घरानों का ही कब्ज़ा था और आम आदमी को बैंकों से किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती थी.

साल 1967 में इंदिरा ने कांग्रेस पार्टी में ‘दस सूत्रीय कार्यक्रम’ पेश किया गया. इसका सबसे अहम कार्य बैंकों पर सरकार का नियंत्रण करना था. इंदिरा सरकार ने 19 जुलाई,1969 को एक आर्डिनेंस जारी करके देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया. बताते चलें कि इस राष्ट्रीयकरण से पहले देश में केवल स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ही सरकारी बैंक था जिसका राष्ट्रीयकरण 1955 में किया गया था.

Nationalization

बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने का कारण

राष्ट्रीयकरण की मुख्य वजह बड़े व्यवसायिक बैंकों द्वारा अपनायी जाने वाली “क्लास बैंकिंग” नीति थीं. बैंक केवल धनपतियों को ही लोन व अन्य बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करवाते थे. राष्ट्रीयकरण के पश्चात क्लास बैंकिंग; “मास बैंकिंग” मे बदल गयी. गांव में भी बैंक के शाखाओं का विकास हुआ.

और भी थे कारण :-

  1. बैंकों से केवल कुछ अमीर घरानों का प्रभुत्व हटाना
  2. कृषि, लघु व मध्यम उद्योगों, छोटे व्यापारियों को सरल शर्तों पर वित्तीय सुविधा देने व आम जन को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना.
  3. बैंक प्रबंधन को पेशेवर बनाना
  4. देश में आर्थिक शक्ति का केन्द्रियकरण रोकने के लिए नए उद्यमियों को प्रोत्साहन देना.

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बैंकों के राष्ट्रीयकरण करने से क्या हुआ हासिल?

1. राष्ट्रीयकरण का एक और फायदा ये हुआ कि बैंकों के पास काफी मात्रा में पैसा इकट्टा हुआ और आगे जरूरी क्षेत्रों में बांटा गया जिनमें प्राथमिक सेक्टर, जिसमें छोटे उद्योग, कृषि और छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स शामिल थे.

2. सरकार ने राष्ट्रीय बैंकों को दिशा निर्देश देकर उनके लोन पोर्टफ़ोलियो में 40% कृषि लोन को जरूरी बनाया इसके अलावा प्राथमिकता प्राप्त अन्य क्षेत्रों में भी लोन बांटा गया जिससे बड़ी मात्रा में रोजगार पैदा हुआ.

3. किसान छोटे कारोबारी और निर्यात के संसाधन बढ़े और उन्हें उचित वित्तीय सेवा मिली.

4. राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की शाखाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. बैंकों ने अपना बिजनेस शहर से आगे बढ़ाकर बैंक गांव-देहात की तरफ कर दिया. आंकड़ों के मुताबिक़ जुलाई 1969 को देश में बैंकों की सिर्फ 8322 शाखाएं थीं और 1994 के आते-आते यह आंकड़ा 60 हजार को पार गया था.


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प्रथम चरण के राष्ट्रीयकरण में मिले उत्साहजनक के कारण सरकार ने 1980 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का दूसरा दौर शुरू किया जिसमें और 6 और निजी बैंकों को सरकारी कब्ज़े में लिया गया था.

ये कहना ठीक होगा कि इंदिरा गांधी की सरकार के द्वारा 1969 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया जाना देशहित के लिए उठाया गया बहुत अच्छा कदम था. बैंकों के राष्ट्रीयकरण से देश का चहुमुंखी विकास संभव हुआ था.

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