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भारत में माथे पर टीका लगाने से क्या होता है? क्या है इसके पीछे का राज

किसी धार्मिक पूजा के बाद क्यों लगाया जाता है हमेशा माथे पर तिलक

भारत में हिन्दू मान्यता के अनुसार हर कोई पूजा करते वक़्त अपने माथे के पर तिलक लगाता है. घर में कोई पूजा हो या कहीं पर भी कुछ धार्मिक उत्सव, शादी वगैरह हो तो बड़े और बड़े बच्चों के माथे पर भी टीका लगा होता है. तिलक लाल के अलावा कहीं जगह पर पीले काले और सफेद रंग का भी होता है.

अगर माथे पर तिलक नहीं लगा होता है तो आपकी पूजा बेकार हो जाती है. लेकिन किसी को इसकी वजह नहीं पता होगी. आखिर माथे पर  टीका क्यों लगाया जाता है इसके पीछे छिपा है वैज्ञानिक कारण. आज हम आपको बताते हैं इस वैज्ञानिक कारण के बारे में.

तिलक के बाद चावल लगाने का अर्थ

धार्मिक मान्यता के मुताबिक हमारे माथें के मध्य में श्री हरि का निवास स्थान होता है. तिलक लगाने के बाद माथे पर चावल या फूल जरूर चढ़ाया जाता है. इसके पीछे कारण माना जाता है कि इसको शांति का प्रतीक मान जाता है. इसलिए तिलक लगाने के बाद चावल लगाया जाता है.

जानिये महिला के मध्य में कुमकुम लगाने का कारण

मस्तिष्क के जिस स्थान पर तिलक लगाया जाता है, उसे आज्ञाचक्र कहा जाता है. शरीर शास्त्र के अनुसार यहां पीनियल ग्रंथि होती है. तिलक पीनियल ग्रंथी को उत्तेजित बनाए रखती है. ऐसा होने पर मस्तिष्क के अंदर दिव्य प्रकाश की अनुभूति होती है. महिलाएं अपने माथे के मध्य में कुमकुम भी लगाती है. जिनका रंग लाल होता है. इसे ग्रंथों में माना जाता है कि लाल कुमकुम ऊर्जा का प्रतीक है.

टीका

इसको लगाने से मानसिक शांति मिलती है. साथ ही हमारा दिमाग एकाग्र रहता है. इसलिए पूजा करते समय इसका इस्तेमाल किया जाता है कि आपका दिमाग कही भटकें नहीं एक जगह एकाग्र होकर भगवान की आराधना करें.

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